दुनिया का गारा, लग जाये सारा।
फिर भी ना बने, घर हमारा।
तेरा सहारा, मिल जाए सारा।
फिर तो बन जाये, घर हमारा।
« कवि जयसिंह कसाना


दुनिया का गारा, लग जाये सारा।
फिर भी ना बने, घर हमारा।
तेरा सहारा, मिल जाए सारा।
फिर तो बन जाये, घर हमारा।
« कवि जयसिंह कसाना