गुज़िश्ता वक़्त ना कल के कहे में बैठी है
मेरी ज़िन्दगी अभी इसी लम्हे में बैठी है
ख़ुशी के आँसू तेरे और इस कदर नमकीन
वो ख़ामोशी अब तलक तेरे कहकहे में बैठी है
मेरी ग़ज़ल को रदीफ़ काफ़िये में न तलाश
लफ़्ज़ों के दरमियान वो अनकहे में बैठी है
~Jahnavi Nandan


गुज़िश्ता वक़्त ना कल के कहे में बैठी है
मेरी ज़िन्दगी अभी इसी लम्हे में बैठी है
ख़ुशी के आँसू तेरे और इस कदर नमकीन
वो ख़ामोशी अब तलक तेरे कहकहे में बैठी है
मेरी ग़ज़ल को रदीफ़ काफ़िये में न तलाश
लफ़्ज़ों के दरमियान वो अनकहे में बैठी है
~Jahnavi Nandan