हद से ज्यादा सतिंदर सरताज सुरीला गाते।
मेरी खुद कुछ भी लिखने की नहीं है कोई औकात।
ये तो प्रभु,नीलू दीदी और मेरी मां ही है जो अपने बेटे सनी से रोज़ कुछ ना कुछ लिखवाते।
सूफी गाने बहुत कम लोग गाते।
नये नये कलाकार तो रोज़ कई मार्केट में आते।
ज्यादा देर तक वो फिर टिक नहीं पाते।
होशियारपुर ज़िले के है सतिंदर सरताज जी रहने वाले।आज बहुत कम सिंगर है सतिंदर सरताज के जितना सुरीला गाने वाले।
कई महफिलें भी सतिंदर सरताज लगाते।
जो भी इन्हें सुनते इनकी आवाज़ सुनते ही रह जाते।
एक से बढ़कर इन्होंने गीत गाये।
इनके सब गीत लोगों को अक्सर बहुत पसंद आये।
सनी करता हाथ जोड़ के एक ही विनती प्रभु,नील दीदी और अपनी मां से आप अपने बेटे सनी को रोज़ ऐसे ही थोड़ा थोड़ा लिखना सिखाएं✍️


