सब कहते है आज मदर्स डे है आया
जिन बच्चों के पास उनकी मां नहीं होगी भला उनका दर्द कोई ना समझ पाया
जिन बच्चों के पास उनकी मां होगी वो तो आज के दिन को अपनी मां के साथ खुशी खुशी मनाएंगे
लेकिन कुछ मेरी तरह बदकिस्मत भी होंगे
जो सिर्फ़ अपनी मां की तस्वीर अपने व्हाट्स अप या फेस बुक अकाउंट पे लगाएंगे
वैसे तो मां शब्द को लेकर अब तक कई कविताएं बन चुकी है
कहने को मां सिर्फ़ दो शब्द है लेकिन इन दो शब्दों पे कई किताबें छप चुकी है
मां शब्द में है इतनी गहराई इसलिए इस मां शब्द को लेकर कई फिल्में भी बन चुकी है
किसी शायर ने बिल्कुल सही कहा है समुंदर की गहराई भी नापी जा सकती है
आसमान में कितने सितारे है इसकी गिनती भी की जा सकती है
लेकिन एक मां की ममता की गहराई नाप सके ऐसी मशीन ना आज तक बनी है ना बनाई जा सकती है
वैसे तो पिता भी बच्चों की ज़िन्दगी में एहम रोल निभाते है
लेकिन जब कभी पिता डांट देते है बच्चों को तो बच्चे सबसे पहले अपनी मां के पीछे जाके छुप जाते है
बड़े किस्मत वाले होते है वो बच्चे जिन्हें ये मौके मिल जाते है
कुछ होते हमारी तरह भी जो अक्सर अपनी मां को जब भी याद करते है अक्सर अपने आप आंखों में आंसू आ जाते है
नहीं आती है रातों को नींद
घड़ी में बज रहे है रात के तीन
वो मां को याद करके लिखने लग जाते है
दिल में लगी होती है मां को खोने की आग
उस आग को फिर वो अपने आसुओं से बुझाने की कोशिश करने लग जाते है
सनी खुद कुछ नहीं लिखता ए दुनियां वालों ये तो प्रभु,नीलू दीदी और मेरी मां है जो अपने बेटे सनी से पता नहीं क्या सोच के लिखवाते है ✍️??
मां आप और प्रिंस जीजू आज भी हमें याद बहुत है आते?
ये लेखक है निमाणा
शहर है मेरा लुधियाना
जगजीत सिंह सनी
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