जैसे फूलों की महकती बाहर।
सावन में बारिश जब जब होती मोर नचाने के लिए हो जाता त्यार।
जन्मदिन है जिनका आज।
लोग पढ़ते है उनकी शायरी कमाल के शायर है साहब गुलज़ार।
पाकिस्तान में इन्होंने अपना बचपन बिताया।
छोटी सी उम्र में मां का सर से उठ गया था साया।
तब आंखों में गुलज़ार साहब की आंखों में आसुओं का सैलाब आया।
बटवारे के बाद इनका परिवार भारत आया।
फिर अमृतसर में इनके परिवार वालों ने अपना घर बसाया।
गुलज़ार साहब कुछ देर वहा रुकने के बाद मुंबई के लिए हुऐ रवाना।
मुंबई में इन्होंने मैकेनिक तक की नौकरी करके दिखाना।
फुरसत के पलों में दीवानगी ऐसी थी इनकी कलम के साथ इन्होंने कविताएं लिखने बैठ जाना।
इतने प्यार से लिखते थे गुलज़ार साहब तभी तो आज तक हर कोई है इनका दीवाना।
सोच लिया था गुलज़ार साहब ने कुछ बड़ा किया जाये।
मेरे लिखे हुऐ शब्दों को लोगों के दिलों तक पहुंचाया जाये।
राखी गुलज़ार के साथ इन्होंने घर बसाना।
लेकिन बेटी मेघना गुलज़ार के पैदा होने के कुछ देर बाद ही दोनों ने एक दूसरे को तलाक दिये बिना अलग हो जाना।
एस डी बर्मन के साथ फिल्मों के गीत लिखना।
हर किसी ने गुलज़ार साहब को बड़े प्यार से पढ़ना और सुनना।
जैसे जैसे गुलज़ार साहब लिखते रहे वैसे वैसे इन्हें बड़े बड़े अवॉर्ड मिलते रहे।
कुछ लोगों के साथ गुलज़ार साहब के शिकवे भी रहे।
(जय हो)गीत के लिए ऑस्कर मिला।
ज़िन्दगी से हर इंसान को रह ही जाता है कुछ ना कुछ गिला।
शायर,लेखक,गीतकार,निर्माता, कवि इस नाम से भी लोग इन्हें बुलाते है।
क्योंकि गुलज़ार साहब जो भी बनाते है दिल से बनाते है।
इससे बड़ी मेरे लिए क्या खुशी की बात होगी ।
मुझे नहीं पता था आज सुबह की दूसरी पोस्ट प्रभु,नीलू दीदी और मेरी मां के आशिर्वाद से सुबह की दूसरी पोस्ट
गुलज़ार साहब के नाम होगी ✍️


