आज हमारे देश की किसी भी नदी का पानी नहीं रहा साफ़। क्यों की लोगों के दिलों में भर गया बहुत पाप।


आज कल लोग सिर्फ पैसों से रिश्ते चलाते।

जिसके पास पैसा नहीं उसे अपने घर तो छोड़ो कभी उसे सीधे ढंग से भी नहीं बुलाते।


वक़्त रहा नहीं सनी लोगों के पास इस लिऐ जब कोई दुनिया छोड़ के जाएं।

लोग उसे जल्दी से जल्दी जलाएं।


मैंने ऐसे लोग भी देखे है जो मरने वाले का अफसोस तक ना मानते। मरने वाले की ज़मीन और पैसों से उसके खुद के बच्चे और रिश्तेदार अपनी नज़र ना हटाते।


सब कुछ हमें मिल जाएं इस सोच के साथ सालों पुराने रिश्ते यहां पल भर में टूट जाते।

आज कल के इंसान बटवारे को लेकर अपने खून के रिश्तेदारों से रूठ जाते।


जो मर जाता है मरने के साल बाद उन्हें उनकी मौत याद आना।

फिर उनकी याद में भगवान के घर जाते, लंगर लगाना। 

अपनों ने ही वहां अपनों को सीधे मुंह ना बुलाना।


 ऐक दूसरे पे मां बाप की ज़मीन जायदाद धोखे से हड़पन के इल्ज़ाम लगाते। झूठी रिश्तेदारी सिर्फ दुनिया दिखावे के लिऐ निभाते। 


और कुछ ऐसे भी होते जो मरने वाले के जाने के बाद पूरी तरह टूट जाते।

कब तक इंसान पैसे और ज़मीन के लिए इतना गिरेगा।

प्रभु को तो सबका ऐक ऐक गुनाह दिखेगा।


प्रभु आपने और नीलू दीदी ने आज सनी से क्या लिखवा दिया ✍️।ये सब सच में होता है आपकी कलम ने ये बता दिया।


क्यों प्रभु आपने हमारी मां को इतनी जल्दी अपने पास बुला लिया। 


पैसों और ज़मीनों ने भगवान के बनाए इंसान को इतना कैसे कैसे गिरा दिया।


(लेखक_जगजीत सिंह सनी)