मैं लिखता तो हूँ तुझे हर रोज अपनी नज़्मों में,
मगर तेरे चेहरे को पढ़ने कि दिल में आरज़ू आज भी है!!
तुझे याद होंगे भी या नहीं किस्से अपनी मोहब्बत के,
मगर अपने दौर-ए-वस्ल कि हर बात मुझे याद आज भी है!!
है तो नही बाकि कोई निशानी मेरे पास तेरी,
मगर मेरी किताब में तेरे गुलाब कि महक आज भी है!!
यूँ तो याद नहीं आती तू दिन के उज़ालों में अब,
मगर मेरी शामों को तेरे ख़्वाबों कि आदत आज भी है!!
हर रात तुझे भुलानें कि इक नाकाम कोशिश ज़रूर करता हूँ,
मगर मेरे दिल के किसी कोने में ज़िन्दा तेरी याद आज भी है!!
 - 'नवांश'