मैं हादसों के सफ़र में था,
उससे मिलना भी तो इक हादसा था,
उससे मोहब्बत भी बे-इंतिहां थी,
शायद यह भी जैसे इक हादसा था..!!
वो आती है अब भी ख़्वाबों में मेरे,
ये भी ऐसे है कि जैसे हो कोई हादसा,
मैं उसको भूल जाने की कोशिश में हूं,
फिर उसकी याद आती है बनकर इक नया हादसा..!!
काश उसको भी कभी इस दुनिया से वहशत हो जाए,
फिर उसी वहशत में वो मेरे गले से आकर लग जाए,
काश 'नवांश' फिर से तुम उसके और वो तुम्हारी हो जाए,
रब करे फिर से ज़िन्दगी में मेरी ऐसा कोई हादसा हो जाए..!!
- Sumit Jadiya 'Navansh'


