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रूहानी रात


सुकून भरी शाम सुहानीचाँद का नूर करे रात रूहानीशबनम के शिद्दत की ये नवाज़िशइस नूर की नज़ाकतज़मीं पे ले आई फ़लक मस्तानीहम तो चले मिलने ख़्वाबीदाआपको सब इस शब् का सजदा

— जागृति
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