इस् दुनीया में
नगाड़े स्वागत करते मेरा
मैं कोख में कभी नहीं मरता हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
पैदा होते ही आंसु पोछ दीये
तब से कभी नहीं रो सका मैं
और ना ही अब रो सकता हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
इंसानी है जिस्म मेरा भी
अगर लग जाए चोट फिर भी
मैं दर्द को
महसूस कर नहीं सकता हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
ज़ख्म पे भी मै हसने
का हुनर रखता हूँ
मर्द को दर्द होता नहीं हज़ूर
मैं मज़बूत होने के लिए मजबूर हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
मैं हर बात सह सकता हूँ
हंस के मार भी खा सकता हूँ
मेरे अहसास मुझ तक ही
बह के बयां कर
सकता नहीं मैं उन्हें कभी
करूँ भी क्यों
क्यों की
मैं लड़का हूँ
मैं कमाता हूँ
मेरी ज़िम्मेदारी है
जो की मैं निभाता हूँ
पर अगर मैं बेरोजगार हूँ
तो मैं बेकार हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
मेरी दाढ़ी से मेरी पहचान है
वर्ना मै छक्का हूँ
मेरे मूँछों तले
दब जाती है मुस्कान मेरी
क्यों की
मैं लड़का हूँ
मैं लड़कियों को समझ सकता नहीं
मैं तो सिर्फ अपनी
चाहत मिटाता हूँ
उंगलियां हरदम
उठेगी मुझ पे ही
क्यों की
मैं लड़का हूँ
आम्दानी बताती काबिलियत मेरी
औकात दीखती है नौकरी
मैं अपनी दिलचस्पी का मैदान
जनाब!
चुन नहीं सकता हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
हमशा से चलति आ
रही याहि रिवायत है
की सक्त रहना ही मेरी आदत है
नज़ाकत से भूल के भी
मैं पेश नहीं आ सकता हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
कभी कभी जी मेरा भी चाहता है
की खुल के मैं
कभी खुद को बयान करूँ
अंदर कहीं नाज़ुक है दिल मेरा भी
की खुल के मैं
भी कभी रोया करूँ
अरे भाई ऐसे कैसे रो लूँ
मैं कोई लड़की थोड़ी ना हूँ
बन ना भी है नहीं मुझे
क्यों की
मैं लड़का हूँ
वावजूद इन सब कुछ के
मैं प्रमुख हूँ
इस समाज में
मुस्कराहट का नकाब
ऐसे ही बनाए रख सकता हूँ
मैं बे-दर्द बन जीने
की ताकत भी रखता हूँ
क्यों की
मैं लड़का हूँ
- जागृति