एक दीवाना था
एक दीवाना था
वो एक परवाना था
शमा के पास जा
उसे जेल जाना था
उसी नूर में दीखता उसे
फलक का नज़राना था
खैरियत के लिए उसकी ही
शाम होती थी दूर
और उसे महसूस होता जैसे
वो बेगाना था
उस शमा की भी क्या कशिश थी
उस दीवाने परवाने को
लगती थी वह शबनम सी
उस परवाने के लिए तो
शमा की कुर्बत ही
सेहर थी,आपका सुरूर था
उस से मुहब्बत ही इनायत भी मौत थी
जो कि ब-दस्तूर था
शामा से बेगानापन
उस परवाने को नामंजूर था
उसके उन्स में जल जाना ही
उसका फितूर था
वो
एक दीवाना था
वो एक परवाना था
-जागृति
