Manqabat: Khwaja Garib Nawaz by Arman Habib Islampuri's image
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मरीज़ ए इश्क हूं तेरा मेरे ख़्वाजा मुईनुद्दीन। 
ज़हे बीमार रहने दे मेरे ख़्वाजा मुईनुद्दीन। 

हुसैनी खून है तुझमे तू है आल ए शहे बतहा 
जमाना फैज़ पाता है तेरे दर से मुईनुद्दीन। 

दिए ईमान का दौलत जो है आला ज़माने में 
हैं नव्वे लाख को मोमिन किए ख़्वाजा मुईनुद्दीन। 

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