औरतों के लिए दुआ!
सुबह सुबह बहुत सी औरतें
घर से बाहर निकलती हैं।
हां वो औरतें ही होती हैं,
माएं, बहिन, बेटियां।
और भी किस किस रिश्ते की
काम पर जाती हैं।
स्कूल जाती हैं, पढ़ने पढ़ाने,
खेत खोदने, फसल काटने।
कारखानों, दफ्तरों में खटने,
परिवार को चलाने।
परिवार के लिए लड़ने,
कभी कभी कभी पूरी करने
किस किस के हिस्से की।
और वो हो सकता है उनका
बाप, भाई , बेटा या शौहर।
या और कोई या,
नहीं होता उनका कोई।
और घर से निकलने से पहले
खुदा हाफ़िज़ कहती हैं,
या नहीं भी कहती कुछ।
पर हैं तो हिफ़ाज़त में तेरी,
तू तो सब देखता है,
तू तो सब जानता है।
रहम कर, करम कर, हिम्मत दे,
साया कर औरतों पर।
के होती नहीं हर जगह तेरी शरियत,
हां लेकिन होती है ज़रुर
हर जगह तेरी रहमत।
#इस्लाम_शेरी


