ज़िन्दगी मशहूर थी

और पीछे खड़े सैकड़ों लोग

मिलने को बेकरार

उनमें एक ' वो ' भी 

जो मुलाक़ात तो चाहता था

मगर जल्दबाज़ी नहीं

तो बस बेताब होकर चलता रहा,

मिलने को तरसता रहा और

जो कुछ ' वो ' ज़िन्दगी से कहना चाहता था

वो सब एक पन्ने पर उतारता रहा....

उस एक पल की आस में

खुद को हर दफ़ा जगाता रहा....

फ़िर अचानक!

एक दिन आया

' वो ' ठहर गया,

समंदर के किनारे जा बैठ गया

और ना जाने क्या देखकर?

घंटों बस हसता रहा....

' वो ' जो मुलाक़ात तो चाहता था

मगर जल्दबाज़ी नहीं।।।