सूरज भले ही डूब गया हो
मगर जो रंग उसने चढ़ाया था
कभी शहर की भीड़ से गुज़र तो
कभी हमें तुम्हे यहां वहां भटकता देखकर।
वहीं रंग वो लौटा भी गया
बोझिल पलकों ने मेरी आखिर सब कह दिया
वो सब जो आज की
खूबसूरती को बेहतर दर्शा गया....
फिर क्या?
शहर अनजान लगने लगा था और
मैं वहीं सो गया।।


