ज़िंदगी वो पहलू है 

जिसका सिक्का मैने उछाला नही , 

मेरे हक मैं वो आह गया 

जिसको मैने कभी चाह नही , 

जिसको माँगा,जिसकी दुआ करी 

वो मेरे हक मैं था या नहीं ऐसा कभी सोचा नही , 


लम्हे युही बीते गए 

हम कभी इस पहलू तो कभी उस पहलू युही झूला झुलते रहे , 

ना हमे सिक्का उछलने का मौका मिला और नही मिलेगा 

ज़िंदगी युही बीत जायेगी और हमे कभी पता ही नही चलेगा ।