एक खुदसुरत लम्हा मेरी जिंदगी का जो तेरे बिना था अधूरा,सुकून भरी रात की चांदनी में वो यू दिल में था सज़ा,
तेरी आहट की आवाज़
मेरे दिल की धड़कन तेज कर जाती है,
तेरा मुझे यूंँ देखना
मेरे को पूरा कर जाता है,
तेरे होंठों पर मेरा नाम
मेरा श्रृंगार बन जाता है ,
तेरा यूंँ हाथ फेरना
मेरे जुल्फों को बड़ा भाता है ,
आज रात की चांदनी में हम चांँद और चकोर बन गए
और हर मंज़िल के हमसफर बन गए।
