काटा तुमनें मुझे अपने फ़ायदे के लिए था,

किसी का पेट भरता हूँ या घर हूँ तुमनें सोचा भी नहीं था,

आज परिंदा फड़फड़ाता तुमहारे घर आता हैं,

क्योकिं वह अपना घर तुमहारे घर देखता हैं |