मैं वो पंछी हू जिसका कोई साथी नही है
पर फिर भी खुले आसमान मे उड़ना चाहता हूँ ,
मैं वो पंछी हू जिसका कोई ठिकाना नहीं
पर फिर भी ख़ुद घोंसला बनाना चाहता हूँ ,
मैं वो पंछी हू जो गहरे समुंद्र को नापना चाहता हूँ
और कड़कती धूप मे रेहगिस्तान की मिट्टी को छू ना चाहता हूँ ,
मैं वो पंछी हू जो चील के आगे डटकर खड़ा होना चाहता हूँ ।
