यह आकार धरती का गोल है ,

कही चंद्र का नूर है ,

तो कही सूरज का कहर,


यह आकार धरती का गोल है ,

कही ओर छाया है ,

तो कही ओर बारिश का फितूर है ,


यह आकार धरती का गोल है ,

उड़ते फड़- फड़फड़ाते पंछियों के सुर है ,

तो किसी ओर हवाओ से उलझते पेड़ों के गीत है ,

यह आकार धरती का गोल है ।