हम दिल से दिल तक नारे लगाते रहेंगे
उन शहीदों की कुर्बानियों को सलामी देते रहेंगे
उन गुलामी से बंधे जंजीरों को तोड़ते रहेंगे
हम युँही स्वतंत्रता का जशन मानते रहेंगे।
२०० साल तक गुलामी सह कर भी ,
हम आज भी सोना है ,और उस सोने की चमक
दुनिया को दिखाते रहेंगे ,
हम दिल से दिल तक नारे लगाते रहेंगे,
उस लहू को आज भी सलाम करेंगे
उस दर्द को आज भी शहादत देते रहेंगे
हम यूंँही स्वतंत्रता का जशन मानते रहेंगे।
हम दिल के टुकड़ों को जोड़ते रहेंगे
उस ७५ साल पूर्व कुर्बानी को नमन करते करेंगे
उन इतिहास के पन्नो को यूंही बताते रहेंगे
उस आज़ादी का दर्द यूंही सुनाते रहेंगे
हम यूंही स्वतंत्रता का जशन मानते रहेंगे।
