आसमान का नीला रंग कहता है नदी से
कि तू दर्पण है मेरा,
सितारों सी मांग तो नथनी मेरी चांद है,
पंछी समूह का मेरा शर्माता हुआ भाव है,
मोर के पंख मेरी ओढ़नी का रंग है ,
लंबे- लंबे पेड़ ओर उन पर सजे फूल मेरी ओढ़नी का काम है (ओढ़नी की कड़ाही हैं) ,
तो उच्चे पहाड़ मेरे सिर का ताज हैं,
और यह कुदरत के रंग मेरी सुंदरता का राज़ हैं।


