ये मौसम में खुमारी है की क्या है
ये होली है दिवाली है की क्या है
रंग लेके खड़ी हो रास्ते में
अब क़त्ल की तैयारी है की क्या है
ना कुछ कहता है न चुप बैठता है
ऐ दिल कुछ बेक़रारी है की क्या है
झुका के नज़र जो मिलती हो मुझसे
कहो ये जाँ-सिपारी है की क्या है
अबके मिले जो वो तो पूछ लेना
तुझे भी मुझसे यारी है की क्या है
कहाँ आके फंसा "ईशान" मै भी
ये दिल्लगी बीमारी है की क्या है


