माना खुदा मैं तेरा कोई ख़ास नहीं हूँ
मगर तेरी सम्त से अभी बे-आस नहीं हूँ
दिलासा देते रहना की तू साथ है मेरे
बिछड़े तो ढूंढ लूंगा इतने पास नहीं हूँ
तुझसे मैं एहतिजाज की ज़ुर्रत भी ना करूँ
मलूल तो हूँ इतना बदहवास नहीं हूँ
काबा ना कलीसा ना मयकदा मेरा तबीब
भुझ जाये बार-हा मैं ऐसी प्यास नहीं हूँ
रोया बहुत मैं क्योंकि जहाँ का निज़ाम है
"ईशान" उसके जाने से पर उदास नहीं हूँ


