इरादा तो है पर उसको बताना हमसे ना होगा

यूँ अपने हाथ से खुद को सताना हमसे ना होगा


तेरी उल्फ़त की चाहत तेरी चाहत सब हमें लेकिन

मगर रातों का ये जगना जगाना हमसे ना होगा


भरा-भरा सा ये दिल कब छलक जाएँ किसे मालूम

हम हँस तो लेंगे पर सबको हँसाना हमसे ना होगा


जिंदगी तुझसे अब कुछ पाने की उम्मीद तो क्या है

मगर फिर भी यूँ खाली लौंट जाना हमसे ना होगा


उदासी रात की तन्हाई में चुभती तो है लेकिन

किसी के साथ फिर दिल का लगाना हमसे ना होगा


"ईशान" और भी कितना ही कुछ लिखने को बाकि है

मगर अब और ये लिखना लिखाना हमसे ना होगा