चले जाओगे जब तुम छोड़ कर मुझको

बहुत याद आओगे हर बार

जब भी मैं ग़ज़ले कहूंगा, नज़्मे लिखूंगा..


याद आओगे हर तालियों में, दाद में मुझको

मेरा हर मतला तुम्ही से शुरू होगा

तुम्ही पे ख़त्म हो जाया करेगा..


चले जाओगे जब तुम छोड़ कर मुझको

मैं तन्हा उन्हीं गुमनामियों में दफ़न कर लूँगा खुद ही को


कभी फुरसत मिले तो आना मिलने, फिर कभी यूँही

निकालना मुझे फिर गुमनामियों से बाहर

फिर से नज़्म हो जाएगी एक

कुछ ग़ज़ले कह दूंगा तुम्ही पे..