बात छेड़ो की दास्ताँ निकले

फिर से मिलने का रास्ता निकले


कल था शिकवा तेरे ना आने का

जो तुम आये तो अब ये जाँ निकले


सुलह कराते थे जो हमारी उनसे

वो ही दोनों के दरमियाँ निकले


लड़ रहे है खुदा के नाम पे जो

खुदा खुद उनसे ही खफा निकले


पर्दा रहने दो मेरे कातिल का

शायद ये मेरा रहनुमाँ निकले


"ईशान" कहता है बड़ा शायर है

देखो कब उसका ये गुमाँ निकले