इस बाहर ए चमन का वो तन्हा गुल कौन है

पूछता है दिल ए नादां मेरा दिलबर कौन है


अब कह भी दूँ के जाने दूँ तुझे ए नाफ़हम 

हैं सब तन ए तबीब यहाँ तबीब ए दिल कौन है 


ना मिला मुरादो से ना खाहिशो पर कोई जोर हैं 

फिर भी होकर रहा दिल जिसका वो गुजीदा कौन है 


होकर के तक़सिम ही सही जो आ जाए वो मेरे हक़ में 

फिर दुनिया में ए दोस्त मुझसा सरमायादार कौन है 


हैं हर मजनू का ये कहना कि मेरा यार चाँद हैं 

मगर मैंने तुझे देखते ही कहा कि ये चाँद कौन है z


गुज़ीदा = चुना हुआ 

सरमायादार = दौलतमंद अमीर 

तबीब = डॉक्टर हकीम 

नफ़हम = मूर्ख