क्या क्या हमने खोया होता, जो हम कभी ना मिलते।

यादों के जो फूल खिले हैं, वो फिर कभी न खिलते।।

कितनी खुशियाँ बांटी हमने, दुःख भी साथ सहे हैं.

कितने तनहा रह जाते, जो तुम न हमको मिलते।।

जितना जाना,जितना समझा, वो क्या कम था वरना।

तुम्हें समझ पाने की हसरत, दिल में ले कर मरते।।

वो तो किस्मत अच्छी थी, जो तुमसे मित्र मिले हैं।

वरना तुमसे मित्र, बड़ी किस्मत वालों को हैं मिलते।।

~इंदिरा