कई बेकार बेघर हो गए हैं।

किसी के लाव लश्कर हो गए हैं।


कोरोना ने गज़ब ढाया है ऐसा

हमारे घर ही दफ़्तर हो गए हैं।


जो पड़ती डांट अपने बॉस से है

मेरे बीबी औ बच्चे सुन रहे हैं।


कहीं मिलते नहीं खाने को दाने

कहीं बोरे के बोरे  सड़ रहे हैं।



लगे करने ग़ज़ल की ऐसी तैसी

मियां जबसे रिटायर हो गए हैं।