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भोर


भोर कुछ देर हंस के लौट गई।धूप कुछ देर तप के लौट गई ।

शाम ए ग़म तू ही साथ दे दे ज़रा,हर ख़ुशी मुस्कुरा के लौट गई।

— इन्दु प्रकाश
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