Poetry 1 min read 784.7K reads

आगे निकल


वक़्त की मनमानियों से मत उलझ, आगे निकल।राख की चिंगारियों से मत उलझ, आगे निकल।

ये तो दुनियां है यहां पर सबकी ढपली, सबके रागबेसुरी शहनाइयों से मत उलझ, आगे निकल।

Read more Earn more Learn more