
मेरे आंगन वट का जो वृक्ष खड़ा है,
बर्षो पुराना अस्तित्व खड़ा है,
जो थर्राते घबराते प्रेत-वास वट में बतलाते,
हम उसकी गोद में खेले थे....
उसी वट की छांव में अपने तो मेले थे,
वट में हजारों पक्षियों का बसेरा था,
अपना तो उन्हीं के साथ सांझ-सवेरा था,
शाखो को बांह
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