गरज-गरज सावन बरसे,जाने कब से नैना तरसे,
उमड-घुमड़ घिर-घिर आये मेघा,घोर मुसलाधार वर्षा बरसे...
दरख्त पेड़ करे स्वागत,बरसे वर्षा नृत्य को आगत,
फुटा तृण-तृण क्षृंगारित धरती,हरी चुनरी ओढ करे स्वागत...
नृत्य करे पंख फैला,नभ को देख भरे स्वांस,
फ़िर-फ़िर नाचे पंख फैला,मन रिझाये मोर-पपीहा...
श्याम-घनश्याम से मेघा,फिरे दिन-भर नभ-आकाश,
विचित्र-चित्र से आकृति बनाए,कभी देव-कभी दानव कहलाए...
सावन आये सावन आये,इतनी खुशी की प्रकाश फैलाए,
हो मन मंत्र मुग्ध,बेरी दामिनी आतिश बाजी दिखाए...
कडक-कडक तांडव दिखाए,अपना रुप-आकार दिखाए,
तेज कड़कड़ाहट से डराए,कभी धरती स्पर्श को आये...
वृक्ष-विटप शीश हिलाए,बर्षा रानी पास बुलाए,
बर्षा पड़े शीश झुकाए,मद-मस्त हिला टहनी नृत्य दिखाए...
प्रकृति को चढ़ी जवानी,बेल-शाख हुई दिवानी,
है प्रभू की अनुपम भेंट,रंग-बिरंगे तत्व समेट...
प्रेम का मुक्त बंधन,मल्हार का ऐसा गान,
त्यौहार का सरताज,है ऐसा आकर्षक सावन...
उपजा-उपजा सूक्ष्म तृण,लिए स्वयं मे प्रण,
पहुंचु उस उचाई,जँहा दिखाई दे सावन हरजाई...
तेज-प्रहार करती वर्षा,प्रवाहित कण-कण चट्टान,
सुरक्षित रहे सूक्ष्म तृण,झुका शीश प्रवाह ओर...
है अमावस्या जिनकी अंधियारी,यह भी है,
सावन की हरियाली,
है पूर्णमासी से पुर्ण प्रकाशित,प्रेम के सच्चे बंधन पर आधारित...
मन मोहित है सावन मे,मन क्षृंगारित सावन मे
मन अखलेठी करे सावन मे,मन उत्साहित सावन मे...
"इन्द्राज योगी"


