मिला जिन्हे है अल्प-न्यून,फ़िर भी बड़ा दंभ-अभिम,

बताये आप कुप मंडूक महान,नही कुप जल से गहरा ज्ञान...

उपहास उडाये,मन बहलावे,यह उपेक्षाओ का दौर,

देखे किधर,जाए जिधर,अपने आप प्रसिध्दी का शौर...

ए सखा आ बैठ,निकट पास मेरे,

कुछ कह अनकहे,कुछ सुना अनसुने किस्से तेरे...

धन-पद मे मदचूर सखा,बारम्बार करे बखान,

गिन गिन गुण अंगुल-अंगूठा,माहौल बनाए स्वयं अनूठा...

कह साथी क्या कमाया,क्या मेरे समान नाम कमाया,

मन ही मन सोचता हूँ,परमसखा था जो भी गवाया...

खेले-कुदे बिताया बचपन साथ,बतलाते है कामयाब आज,

कुछ कौडी क्या कमाए,पहने है श्रेष्ठ का ताज...

धन-लक्ष्मी के वास अनेक,बदले क्षण भर द्वार अनेक,

विधा-देवी बसे मुख-मण्डल,कुमति जकडे मनुष्य अनेक...

करो ना अभिमान,झुकाओ ना मेरा स्वाभिमान,

मैं मन से बंधा,मन मेरा सर्वशक्तिमान...

तुम भी बने हो,मैं भी बनूँगा,

हार ना मानुगा,श्वास ना हारुगा...

तुम चले जिस राह-डगर,कदम है फ़िर भी भटके मगर

तुम मिले पथ मे अगर,ना बनू मुसाफिर सहचर..

हाँ मैं चलूंगा,मैं ना भटकुंगा...

तानो की ही टीस सही,कदम उठ चला ही सही,

अच्छा ही हुआ कही तो पहुचें,

गिरते-पडते मंजिल तक पहुचें...

ताने-बाने से पूरित जीवन समूचा,

अच्छा हुआ मुकाम तक पहुचा...

         "इन्द्राज योगी",