प्रेम को मनुष्यों ने केवल मात्र उपभोग और दिखावे के साधन के रूप में प्रयुक्त किया है,सच्चा प्रेम तो अमुक और अमानसिक है उसे शब्दों,आवाज और दिमागी शक्ति एवं प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं है....!"इन्द्राज योगी"