फिर कवि बनने पर जीवन में मेरे बदलाव आया सोने लगा मैं मेरी कविताओं के साथ,उठने लगा सूर्य के प्रकाश से विचारों के साथ,अल्पाहार करता मैं फिर तीखे व्यंग प्रहार के साथ,मध्यांतर पुर्ण करता मैं मेरा लघु कथाओं के साथ,सांझ ढलती मेरी चंद पंक्तियोंं के साथ फिर नसीब ना हुई मुझे कोई भी तन्हा रात....

"इंद्राज योगी"