सुना है शहर में तूफान आने वाला है,
सुना है शहर में तूफान आने वाला है,
नाम दिया निवार उसे,
जिसका कोई वार नहीं,
होता तभी ही निवार,
लेकिन है विपरीत नाम के यह,
होंगे वार तीक्ष्ण तेज सभी...
यह तोड़ेगा देखो उम्मीदें कई,
करेगा तबाह हरियाले-खलिहानों को,
गरीबों के छप्परों को,
तटस्थ खड़े उन पेड़ों को,
जो आश्रय है मानव जाति के,
जो आश्रय है बेजुबां परिंदों के....
उत्पन्न सागर से यह एक श्राप है,
गुजरेगा जब शहर से,
कर देगा वीरान,
रोकेंगे बदरा अपनी बर्षण शक्ति से,
तेज हवाओं के थपेड़ों से,
यह भी बेबस होंगे....
बैठे है दुबके जो अपनी-छोटी सी कुटिया में,
होगी भी या नहीं थोड़े चंद आगामी क्षण में,
है,हमारे पास तो आसरा,
लेकिन जाएंगे कहां वो,
जो आवारा है सदा....
तैयारी है राजतंत्र की,
वार से निवार को निपटाने की,
होगी लेकिन विफल सभी,
है जोर किसका चल पाया,
सृष्टि से जो टकराया,
उसे औंधे मुंह गिराया....
है किस में हिम्मत तूफ़ानों से टकराने की,
है हिम्मत किस में प्रचंड वायु वेग से,
आंख से आंख मिलाने की....
होगा दौरा हेलीकॉप्टर का,
देखेंगे प्रभावित क्षेत्र,
आसमानी दृष्टि से देखेंगे नेताजी,
धरातल प्रभावित क्षेत्र जो होगा संपूर्ण....
जो भी है संपत्ति मात्र,वो भी खोएंगे,
लेकिन नहीं होना है हताश,
तूफान-आपदा तो आएंगे,
अपना कर्म है,कर्म करना,
अटल-अथक करते रहना,
है नीड़ का निर्माण फिर से करना,
है नीड़ का निर्माण फिर से करना....
"इंद्राज योगी"


