नीड़ को उजाड़ा है,सपनों को रौंदा है,

हौसले फ़िर भी बुलंद है,जुल्म करने वाले तुने आत्मा को कौंधा(असहनीय चमक) है


दो पंक्तियाँ कंगना रनौत के लिए