थमता कहां हैं,
ये दौर कैसा,
गुजरते दिनो का,
ये शोर कैसा,
दिनोंदिन बढ़ता,
और घटता,
कैसा शोक,
कैसा हर्ष,
महीनो संग,
गुजरे वर्ष,
यादें,बातें,
मुलाकातें,
छत,खिड़की,
अहाते,
महसूस करते,
बैठे हम,
लगा टकटकी,
घूरते आसमां,
टटोलते शब्द खामखां,
बीत गए,
दिन सभी,
दुख के,
कुछ सुख के,
बीता नही,
पहर पर,
ये कैसा,
उम्मीदों पर,
बरपा कहर जैसा,
आकाश वही,
धरती वही,
नदियां सरपट,
मुड़ती यही,
गाए नवगान,
मधुर यहां,
गूंजता है,
कर्णप्रिय,
कलरव यहां,
फिर आएंगी घड़ी,
सुकून की,
आशा में लिपटी,
किरण आभामय,
भोर प्रभात को,
कर प्रकाशमान,
दे तम को,
चकमा,
आगाज है,
नवबर्ष का,
हृदय तल में,
उठे उत्साह,
नवहर्ष का,
ले नवबर्ष,
संकल्प दृढ़,
गढ़ जीवन की,
इमारत सुदृढ़,
बनाएं जीवन,
महान,
सेवा भाव,
प्रेम की नींव भर,
होठों पर हंसी हो,
हृदय में ढाह,
न कहीं फंसी हो,
बढ़ा हाथ,
सहयोग का,
आगे बढ़े,आगे बढ़े,
~इन्द्राज योगी


