कली का भौंरे से,

आसमान का बादल से,

धरती का पानी से,

पेड़ों का पक्षियों से,

जो है रिश्ता,

वही है हमारा तुम्हारा,


हां! किसी दिन,

कली से भौरा बिछड़ जाएं,

आसमान से बादल छंट जाए,

धरती का पानी सुख जाएं,

पक्षियों के पेड़ कट जाएं,

और हम भी तुमसे बिछड़ जाए,


तो यह स्थिति,

इस लोक की,

सबसे कष्टदायक स्थिति होगी,


ना भौरे की गूंज सुनाई देगी,

ना बादल गर्जना करेंगे,

जल लहर विहीन हो जाएगा,

कल-कल की ध्वनि खो जाएगा,

पेड़ों की सरसराहट गुम हो जाएंगी,

पक्षियों की चहचाहट चुप हो जाएगी....

~इन्द्राज योगी