हां मैं लिखूंगा,

जब अन्याय की आंधी चलेगी,

लेखनी मेरी बरसात बनेगी,

मैं बादल-सा मंडराऊंगा,

बारिश की बूंदों से सच लिख जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

प्रताड़ित होगा जन कोई,

दुखी होगा मन कोई,

मैं हमेशा साथ निभाऊंगा,

स्याही को शब्दों में ढाल,

मैं भाल तुम्हारी बन जाऊंगा,

हां! मैं दुख तुम्हारे लिख जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

जीवन में संकट कई,

चुभे क्षण-क्षण कंटक कई,

मैं कंटक सभी निकाल जाऊंगा,

सहला के जीवन तुम्हारा,

दुलार तुम्हारा लिख जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

मजबूर सी तुम्हारी आंखों से,

मैं विवशता पढ़ जाऊंगा,

बहे ना इन आंखों से अश्रु,

संवाद ऐसा कह जाऊंगा,

संचित अश्रुओं से,

किंचित ही कुछ लिख जाऊंगा…



हां मैं लिख जाऊंगा,

मशगूल है जो चूल्हे की धुंआ में,

फूंक तुम्हारी लिख जाऊंगा,

है गोल रोटियां का आकार,

जीवन बेआकार मैं लिख जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

जीवन का अहम पल दुख,

दुख को मैं सुख लिख जाऊंगा,

अनुभूति तुम सुख की करना,

मैं दुख तुम्हारे लिखते जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

संघर्षरत तुम रहना,

मैं संघर्ष तुम्हारा लिखते जाऊंगा,

हार को हरा दो तुम,

मैं प्रयास तुम्हारा लिख जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

पथ पर बढ़ो,

मैं कदम तुम्हारे गिनते जाऊंगा,

पथ पर मिले कंटक सभी,

मैं बीनते जाऊंगा,

तुम करों प्रयास अथक,

मैं कोशिशे तुम्हारी लिख जाऊंगा…


हां मैं लिखूंगा,

आश ना हारों,

मैं निराशा सभी मिटाते,

चले जाऊंगा,

उम्मीदें तुम जिंदा रखो,

मैं शब्दों में लिख तुम्हे,

जिंदा कर जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

होगा प्रायोजित असत्य,

मैं सत्य को नियोजित कर जाऊंगा,

हो बलशाली चाहे जितना,

परास्त इसे कर जाऊंगा,

कागज पर मैं इससे इतना लड़ जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

जीवन है दुर्गम,दुर्भर,दुखदायी,

दुखता है जैसे फटी हो विवाई,

मैं मलहम ऐसा बन जाऊंगा,

जीवन बने नम सुखदायी,

एहसास ऐसा लिख जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

तुम बनो पार्थ,

सारथी मैं बन जाऊंगा,

एक गीता-सा उपदेश दे,

मैं तुम्हारे जीवन की,

महाभारत लिख जाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

हां मैं लिखता रहूंगा,

है मेरा तो यही सहारा,

पुकारना मुझे आवाज देना,

लेखनी मेरी को तुम्हारा सहारा बनाऊंगा…



हां मैं लिखूंगा,

हां मैं लिखता रहूंगा,

समर्पित जीवन तुम्हे कर जाऊंगा,

सफल जीवन मैं जी जाऊंगा,

अगर काम तुम्हारे मैं आ जाऊंगा…


”इन्द्राज योगी"