एक बार फिर भ्रम-ए-इश्क़....'s image
Love PoetryPoetry2 min read

एक बार फिर भ्रम-ए-इश्क़....

Indraj YogiIndraj Yogi December 5, 2021
Share0 Bookmarks 59415 Reads0 Likes
एक बार फिर भ्रम-ए-इश्क
हमने अपने दिल में पाल लिया,
झुकी आंखों से उसकी,
फिर शर्म-ओ-हया को जान लिया,


अब फिर हम दीवाने होंगे,
कागज,कलम,दवात,
और शायरी हमारा सहारा होंगे,


चुनेंगे एक और सनम,
अब आशिकी को हम,
होगा फिर एक बार और,
हमे भ्रम-ए-इश्क़,


फिर लटे उलझेंगी,
कानो के झुमकों से,
और आंखे झीलों-सी,
झिलमिलाएंगी,
टकरा अधरों रूपी नाव से,
शब्दो में फिर से,
चुनर लहलाएंगी,


तेरी ओर से लौटी,
पुरवाई फिर हमें सहलाएंगी,
दे झोंका तन को मेरे,
खुशबू को तेरी,
मेरी बांहों में भर जाएंगी,
उस रोज की तरह,
इस रोज भी,
करतूतें तेरी या मेरी,
कोई नई कहानी लिखवाएंगी,


पर नही उत्साह,
मन में मेरे,
जो था पहलों

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts