दोस्ती वो दोस्ती जो,
दोस्त को दुख से उभार कर खुशनुमा माहौल बना दे,
रोने वाले क्षणों मे भी खुलकर हंसा दे,
दोस्ती वो दोस्ती...।।1।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
जीवन के महत्वपूर्ण पलो मे, जिनका जिक्र कर मन हंसी के ठहाके लगा दे,
बचपन की करतूतो को याद कर हंसी पेट पकड़वादे,
दोस्ती वो दोस्ती..।।2।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
बात-बात पर लड़ना,थोडी देर बाद वापस घुल मिलना,
बेवजह हर जगह अपना हक जताना,
बैंच से लेकर बैग तक अपना स्थान बताना,
दोस्ती वो दोस्ती...।।3।।
दोस्ती वो जो दोस्ती,
एक साथ रह्ते थे,गुटबन्दी भारी थी,
उस विधालय मे,हमारी दुनिया न्यारी थी,
दोस्ती वो दोस्ती...।।4।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
खेल-खेल मे प्रतिभागी थे,होड़ ना जीत पाने की
जिद पर जिद जिद्दी थे,थी जिद थोड़े पल मे सम्पूर्ण जीवन जीने की,
दोस्ती वो दोस्ती जो...।।5।।
दोस्ती वो जो दोस्ती,
सबके सब नटखटी थे,पर चंचल मन स्थापित थे,
उडे थोडी खिल्ली, मिल कर उपहास उडाते थे,
वो दिन भी क्या दिन थे,मिल कर मौज उडाते थे,
दोस्ती वो दोस्ती...।।6।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
जीवन का था स्वर्णिम पल,समझौते की कोई दीवार ना थी,
खिले-खिले मुखडो पर,गम की कोई जंजीर ना थी,
दोस्ती वो दोस्ती...।।7।।
दोस्ती वो जो दोस्ती,
सखा छाया मे गुजरा जीवन,सिर्फ सखा ही छायाचित्र था,
ना कोई भय ना कोई साया,सिर्फ सखा ही हमसाया था,
जीवन के मध्यान्तर मे नही विधा के मध्यान्तर मे,हमने बदला खाना था,
बस इसी का स्वाद विधा तक ही आना था,
दोस्ती वो दोस्ती...।।8।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
दोस्त मेरा दोस्त है,सर्वोपरि जीवन स्तम्भ है,
जिन बुनियादो पर खड़ी मेरे जीवन की मंजिल,नीव इसकी दोस्त है,
दोस्ती वो दोस्ती...।।9।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
जीवन चक्र घूमता रहा,मैं इन घडियों झूमता रहा,
समय की चाल बेहद तेज,विरह से सजी ख्वाबो की सेज,
जीवन के भी नियम अनेक,बदले क्षण-क्षण,
दोस्त बदले,दोस्ती बदली,बदला दोस्त का अर्थ,
दोस्ती वो जो दोस्ती...।।10।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
स्वार्थ लोलुप्ता से भरी,कहीं साजिश का षड्यंत्र,
घर भेद की रजिश,धन स्वामित्व की दोषी दोस्ती,
दोस्ती वो दोस्ती...।।11।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
है दोस्ती के कई उदाहरण,तर्क जो देते है,
खामियांँ बहुत गिनाते-गिनाते,हम तो दोस्ती से बचते है,
दोस्ती वो दोस्ती...।।12।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
मायुस बोल मुख राज पता करे,पीठ पीछे हंस-हंस राज-ए-दिल बयां करे,
परहेज है इस श्रेणी के आस्तीनो से,हम करे छोटी आस्तीन ताकि घुस ना पाये कोई,
दोस्ती वो दोस्ती...।।13।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
मन अकेला तन अकेला,क्यु बनाऊ कमजोरी अपनी,
दोस्ती के कई उदहारण,नही दिखाई कहीं है धोखा,
गरीब सुदामा राजा कृष्ण,मेल भी तो अनोखा है,
मित्रता धर्म सबसे उपर,कई मुश्किलो से निकला है...
यह धर्म कोई निभाए,यही स्वर्ग की बेला है,
दोस्ती वो दोस्ती...।।14।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
सनातन से यह चला आया,परम जोडी बहुत कोई निभा पाया,
बनी जोडी बनी मिसाल,उदहारण कायम दुनिया मे कर पाया,
दोस्ती वो दोस्ती...।।15।।
दोस्ती वो दोस्ती जो,
बनाओ दोस्त,श्रेष्ठ है दोस्ती,
अनेक मुश्किलो का हल है,दोस्ती
पर ना पालो सांप,ना पालो षड्यंत्रकारी...
सहस्त्र से अच्छा एक ही,जान भी दे दे नि:संकोच,
दिखावे का संसार नही,हो मन से मन का रिश्ता....
दोस्ती वो दोस्ती...।।16।।
"इन्द्राज योगी"
