दिल नासाज,धड़कन बेवाज़ है,

तबियत सरगस्त,यार नाराज है,

क्यों ना चलो दौर-ए-फुसलाहट ले आए,

एक आंधी उठे मोहब्बतों की,

और यार धूल-सा बहल जाए,

उड़ चले संग आकाश चूम,

आवारगी में मिरी साथ घूम......

"इन्द्राज योगी"