बहुत दिनों का थका हूं,बहुत दिन हुए है पैर पसारे,बहुत दिनों से नसीब नही,सुख भरी रैन निशा रे़,चिंता बैरी छीनने को उतारू,सुख चैन बिना विचारे..."इंद्राज योगी"