ऊंचा कौन पर्वत या बादल..?

कभी बादल नीचे तो कभी ऊपर,

लेकिन तटस्थ सदा रहे वो,पर्वत....


शीतल कौन हवा या दरख़्त..?

बहती रहती यहां-वहां हवा,

लेकिन स्थिर सदा रहे वो दरख़्त....


अस्थिर मन,छल-छल है प्रवाहित जल..?

है दोनों ही अस्थिर,

उठे भंवर जब जल या मन में,

हो जाते दोनों ही अस्थिर....



प्यास बुझाए कौन,जल या तृष्णा..?

जल आपूर्ति तन की,तृष्णा मन की....


छल,कैसा रूप अनेक..?

कभी शत्रु तो,कभी मित्र जैसा....


शत्रु कौन,शत्रु कैसा..?

स्वयं मन-तन हो जैसा....


मित्र कौन,है या नहीं..?

स्वार्थ सिद्ध,प्रहार चोंच जैसे गिद्ध....


धन कहा,हो कैसा..?

मेहनतकश,पसीने जैसा....


प्रेम क्यों, कैसा..?

विरक्ति से परे,मोह मुक्त जैसा....


परिवार कौन,वार कैसा..?

बैठे मिल-जुल बीते दिन,मनभेद जैसा....


आह कैसी,निकली कैसी..?

दुखाया पर पीड़ जिसका,निकली हृदय वेदना में ऐसी....


वाह वैसी,कैसी-कैसी..?

प्रदर्शनता ना हो ऐसी,अहंकार की छवि जैसी....


राह कैसी,कहां..?

सुकर्म पनपे,काबिल बना दे जहां....


मंजिल ऊंची,या कोशिश..?

कोशिश कद उच्च,मंजिल उच्च हो या तुच्छ....

"इन्द्राज योगी"