मैं अक्सर व्यस्त रहता हूं,

जिस दिन व्यस्त ना रहा,

अस्त हो जाऊंगा,

अतीत की काल रेखाएं,

चिंता का रूप धारण कर,

जकड़ चुकी होगी,

मन,मन:स्थिति को मेरी,

और एक बार फिर,

निराशाओं का अंधकार,

सम्पूर्ण कामनाओं को घेर चुका होगा,

फिर अंतरात्मा से,

एक दबी सी आवाज,

निकल कर सुनाई देगी,

आह! अब और नहीं....

★इन्द्राज योगी★