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आलिंगन


भीगती बारिश की हवा का आलिंगन,हमें यूँ छू जाता है ऐसे..भर लेती है प्रेयसी कोई,अपने प्रेमी को बाहों मे जैसे...."इन्द्राज योगी"

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