आज मन उदास है,याद आई वो शाम है,
वो ही डुबती आस है,वो ही ढलती सांझ है...
जाती ही नहीं दिल से,वो हसी वो मस्ती,
बहुत याद आती है,वो पुरानी हस्ती...
मैं बेफिक्र तुम बेफिक्र,नहीं फिक्र जमाने की,
हम बदले कुछ इस तरह,लगी फिक्र कमाने की...
खोई शरारत,छीना बचपन,गुम है कहीं वो ठिकाना,
गिरते-संभलते,खेलते-कूदते,दिन वो क्या खोज देगा ये जमाना...
अब ना कोई शरारत है,फ़िर भी बहुत हरारत है,
अब ना कोई चाहत है,फ़िर भी मन आहत है..
दिल ही दिल मे भेद,चारो और मनभेद,
एक उतारे एक चढाये,मैं क्या जानू इन मुखौटों का भेद...
मन ही मन उपजे अभिलाषा,प्रवंचना भरी दिलासा,
बोल मीठे,अर्थ कड़वे,कहो किससे करू अब मैं आशा...
कौन आये-कौन जाये,यहां यही है रोना,
वो छोड़े हम छोड़ेगे,अन्ततःसब कुछ यही है खोना...
जीवन जियो उन्मुक्त होकर,निश्छल-निस्वार्थ,
खोजे बेबाक-बेफिक्र बचपन,
मन हो बच्चा व्यस्त जीवन का सार...
"इन्द्राज योगी"


